MIGRAINE

Migrano- आयुर्वेदिक शास्त्रों में कई ऐसी औषधियों का उल्लेख आया है जो की स्पर्श मात्र से अपना प्रभाव दिखाती हैं, स्पर्श मात्र से कई व्याधियो में अपना प्रभाव दिखाती हैं, और बीमारियों को ठीक करती हैं. इन्ही में से एक औषधी Htereoseermum Chelonoides Dc  (परारी) है. भावप्रकाश निखंटू में लिखा है इसके फली के टुकड़े को बाँधने पर यह अधकपारी में बहुत लाभकारी है. क्यूंकि प्रयोग अति सरल था, और अधकपारी अर्थात Migraine के रोगी की संख्या बहुत अधिक है सोचकर इसका प्रयोग हमने Migraine के मरीजों पर करना प्रारंभ किया.

क्यूंकि यह औषधि खाने के लिए नहीं है केवल त्वचा से स्पर्श की जाती है तो इसका साइड इफ़ेक्ट होने की कोई सम्भावना ही नहीं है अतः हमने लोगो के ऊपर प्रयोग किया जिससे हमने पाया कि लगभग 80% लोगो को इससे पूर्ढ़तयः लाभ हुआ.

अतिसुगमत से उपलब्ध मूल्य में नगण्य होने के कारण जन कल्याण की द्रष्टि से हमने इसको निःशुल्क देना ही स्वीकार किया. इसको प्राप्त करने के लिए आपको अपना पूरा पता लिखा हुआ लिफाफा उचित डाक स्टाम्प लगा हुआ हमें भेजे जिससे हम यह औषधि रखकर आपको पोस्ट कर सके.

प्रयोग- इसको प्रयोग करने की विधी अत्यंत साधारण है. शरीर के किसी भी भाग में जैसे गले में पहनने वाली चैन में, हाथ की घड़ी के पट्टे पर या शरीर के किसी भी भाग में इस तरह बंधे के ये त्वचा को स्पर्श करती रहे.

LIVER PROBLEM

गर्मियों का मौसम आगया है इसमें दूषित पानी मछरो के काटने और विभिन्न कारणों से विभिन्न तरह के बुखार अपना प्रकोप दिखाने लगते हैं. इन बुखारो को नियंत्रित करने के लिए सामान्यतः peracitamol और अन्य बुखार को नियंत्रण करने वाली औषधियां दी जाती हैं जिनका असर लीवर के ऊपर होता है और लीवर बीमार होने लगता है एक नया रोग जन्म लेता है जिसे पीलिया कहते हैं. इसमें आँखे पीली, शरीर का रंग पीला दिखाई देने लगता है यह आँखों एवं शरीर का पीला रंग खून के अन्दर रेड सेल के टूटने पर एक पदार्थ बनता है जिसको billirubin कहते हैं, खून में billirubin की मात्र बढ़ने से खून का रंग पीला होने लगता है खून के रंग के ही कारण हमारे शरीर गुलाबी रंग लिए हुए होता है वह रंग बदलकर पीला दिखाई देने लगता है. प्रायः लोग इस पीले रंग से डरने लगते हैं और पीली चीजों का सेवन बंद कर देते हैं जैसे ख़ास तौर से हल्दी को बंद कर दिया जाता है. भोजन की थाली से हल्दी का परहेज सबसे अधिक होता है. जबकि आयुर्वेदिक शास्त्र भावप्रकाश में हल्दी को यकृत विकार में उपयोगी लिखा है पता नहीं कहा से समाज में हल्दी के परहेज की गलत धारणा चल चुकी है जबकि हल्दी पीलिया रोग में भावप्रकाश के अनुसार एक औषधि का काम करती है.
पीलिया रोग (jaundice) में seerum billirubin जिसका मानक 1% तक नार्मल होता है से बढ़ने लगता है यह billirubin बढ़ता है तो लीवर में से अन्य toxic enzyme SGPT, SGOT, Alkaline Phosphate आदि भी बढ़ने लगते हैं. यदि serum billirubin का मानक 20% से ऊपर जाने लगता है तो जीवन खतरे में मानने लगते हैं इस स्थिति में रोगी के शरीर का रंग पीला आँखे अत्यधिक पीली किसी भी चीज़ का ना पचना हर समय जी का मचलना उलटिया होना और शरीर में खाज होना लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इस स्थिती में लीवर या यकृत अत्यंत बीमार होता है , allopathic चिकित्सा के अनुसार माना जाता है कि शरीर को विश्राम देना ही मुख्य उपचार है क्यूंकि इस स्थिती में उपचार के लिए कोई allopathic औषधी भी नहीं है जबकि आयुर्वेद में यकृत विकार पर औषधियों का भण्डार है. आयुर्वेद के प्रणेता ऋषियों ने इस घातक बीमारी पर गहन अध्ययन किया होगा और आयुर्वेदिक शास्त्रों में वर्णित सेंकडो औषधियां आयुर्वेदिक ग्रंथो में उपलब्ध हैं और सफलता पूर्वक पीलिया (jaundice) या लीवर के कई अन्य बीमारियों में सफलतापूर्वक उपचार कर रही हैं जिनमे से एक हमारे द्वारा निर्मित SAVLIV DROP है जिसको इस प्रकार के रोगी को देने पर serum billirubin एवं अन्य toxic enzyme अविलम्ब नियंत्रण में आते हैं. रोगी को आरही समस्याओं जेसे जी मचलना, उलटी होना, और बदन की खुजली में अविलम्ब राहत पहुँचती है और रोगी स्वस्थता की ओर आने लगता है यदि लीवर खाली बढ़ा हो उसमे CIRRHOSIS ना हुई हो केवल अभी पीलिया रोग से ही पीड़ित हो तो पीलिया एक महीने के अंदर ठीक हो जाता है.
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