Jaundice & Turmeric

पीलिया (jaundice) या कामला लीवर की बीमारी है, इस बीमारी में रक्त के लाल रक्त कोशिकाए का टूटना अधिक हो जाता है और यह लाल रक्त कोशिकाए  टूटकर एक बिलिरुबिन नामक द्रव बनाते हैं I यूँ तो यह लाल रक्त कोशिकाए टूटती रहती हैं और नई बनती रहती हैं अतः रक्त में बिलिरुबिन प्रायः पाया ही जाता है और इसका सामान्य स्तर 1% से कम होता है लेकिन जब रक्त कोशिकाए सामान्य से अधिक टूटने लगती हैं तो बिलिरुबिन का प्रतिशत बढ़ जाता है और बिलिरुबिन का रंग पीला होने के कारण खून का रंग भी पीला होने लगता है इसका प्रभाव यह होता है कि पीलिया से ग्रसित व्यक्ति की आँखे नाखून हथेली का रंग पीला दिखाई देने लगता है I रोगी अत्यधिक कमजोरी महसूस करता है, व्यक्ति पीला लगने लगता है क्यूंकि इसका असर यकृत पर होता है और यकृत बीमार होने लगता है परिणामस्वरूप  भूंख लगना बंद हो जाती है, रोगी का जी मिचलाता है उल्टिया होने लगती हैं और रोगी बहुत बेचैनी एवं कमजोरी महसूस करता है I

पीलिया के उपचार के लिए गाँव कस्बो में लोग झाड़ फूँक का सहारा लेते हैं किसी हद तक इससे लाभ भी होता है क्यूंकि वैज्ञानिको का मानना है कि लीवर स्वयमेव भी मानसिक चिकित्सा से भी अपना उपचार स्वयं करने की क्षमता रखता है लेकिन यदि पीलिया का असर लीवर पर अधिक हो जाये तो यह मानसिक चिकित्सा कारगर नहीं होती है I

पीलिया होने पर लोग पीली वस्तुओ से परहेज़ करने लगते हैं, झाड़-फूँक करने वाले पीले वस्त्रो तक का परहेज़ बता देते हैं और हल्दी का परहेज़ बताते हैं जबकि आयुर्वेदिक ग्रन्थ भावप्रकाशनिघंटु में हल्दी को पीलिया की औषधि कहा गया है I यह भ्रान्ति कहाँ से प्रारंभ हुई कहना कठिन है, पीलिया में हल्दी का परहेज़ कभी नहीं करना चाहिए I

पीलिया में SAVLIV DROPS भी पहली खुराक देते ही जी मिचलाना, उल्टिया होना बंद हो जाता है और मरीज़ को एक-दो दिन में भूंख भी लगने लगती है और सामान्य पीलिया प्रायः सात-आठ दिन में बिलकुल ठीक हो जाता है और बिलिरुबिन का स्टार 1% से कम हो जाता है I

पीलिया में घी, तला भुना घरिष्ट भोजन, फ़ास्ट फ़ूड आदि बिलकुल नहीं लेने चाहिए बल्कि स्वच्छता से निकाला गया गन्ने का रस, मूली, पालक, हरी सब्जियां आदि लेनी चाहिए I

Jaundice in New Born Baby.

नवजात शिशुओ में पीलिया होना बहुतायत से पाया जाता है लगभग 70-80% नवजात शिशुओ में पीलिया 24 घंटे से 7 दिन के बीच में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जब शिशु जन्म लेता है तो उसके शरीर में रेड सेल्स की मात्रा बहुत अधिक होती है और जब यह रेड ब्लड सेल्स टूटने लगते हैं तो इनके टूटने से खून में billurubin की मात्रा बढ़ने लगती है जिसका रंग पीला होता है और इसी कारण बच्चें की त्वचा का रंग पीला दिखाई देने लगता है, आँखे व नाखून भी पीले दिखाई देने लगते हैं  I लीवर की अपरिपक्व्ता के कारण यह billurubin गुर्दों एवं यकृत द्वारा साफ़ नहीं हो पाता है अतः खून में billurubin बढ़ जाता है और खून का रंग पीला होने के कारण उपरोक्त लक्षण दिखाई देने लगते हैं I सामान्यतः बच्चो में पीलिया होना स्वाभाविक कारण है , फिर भी यह रोग ना बढ़े के लिए सावधानी बरतना ज़रूरी है I इसके लिए बच्चे को प्रातः काल की सुनहरी धूप लाभदायक होती है I तेज़ धूप में बच्चे को नहीं रखना चाहिए I

कुछ वर्ष पहले जाँन हापकिंस  विश्वविद्यालय में सिद्ध किया था की billurubin एक शकित्शाली ओक्सिडेंट है यह बच्चो की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है इसलिए पीलिया कोशिकाओ के नुकसान के विरुद्ध एक रोध की तरह कार्य कर सकता है लेकिन पीलिया के लिए उचित देखभाल की जानी चाहिए I

क्यूंकि जाँन हापकिंस  विश्वविद्यालय ने सिद्ध किया कि यह billurubin एक शक्तिशाली ओक्सिडेंट है, को शांत करने के लिए Savliv Drops अत्यंत प्रभावी होनी चाहिए क्यूंकि Savliv एक एंटी-ओक्सिडेंट औषधि है जिसमे फिनोलिक कंपाउंड, टेनिन, फ्लोवोंस, विटामिन सी और विटामिन ई, एंटी-ओक्सिदेंट्स तत्व हैं इसी के साथ ही हाइड्रोजन पेरोक्साइड और नाइट्रिक एसिड दोनों के एक-एक ऑक्सीजन फ्री रेडिकिल हैं जो कि billurubin की ओक्सिडेंट शक्ति को शांत कर लाभ पहुंचा सकता है, Savliv Drops को काफी नवजात शिशुओ को आधी बूँद देकर देखा गया कि नवजात शिशुओ को तुरंत लाभ हुआ और उनका billurubin लेवल सामान्य हुआ I

SAVLIV’ DROPS पर चले अनुसन्धान में पाया गया कि SAVLIV DROPS एक निरापद औषधि है, यानि कि जिसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है I

आधी बूँद की मात्रा करने के लिए दो चम्मच पानी में SAVLIV DROPS की एक बूँद मिलानी चाहिए और उसमे से एक चम्मच बच्चे को देनी चाहिए और एक चम्मच शिशु की माँ को दे देनी चाहिए I