DENGUE

डेंगू बुखार में सर में सामने की तरफ तेज़ दर्द, आँखों के पीछे तेज़ दर्द, मांसपेशियों व जोड़ो में असहनीय दर्द, छाती एवं बाहों पर खसरा की तरह दाने पड़ना, पेट में लगातार तेज़ दर्द, खाल का ठंडा पीला एवं सिकुड़ना, नाक मूह और मसूड़ो से खून आना, उलटी में खून आना, मल पेशाब में खून आना, रोगी को अत्यधिक घबराहट होना डेंगू के मुख्य लक्षण हैं. आयुर्वेद  के अनुसार 10 gm. खूब गला को 2 ltr. पानी में उबालकर साधारण यानी रूम temp. पर रख ले और यही पानी रोगी को पीने के लिए दे. डेंगू बुखार में blood platlets तेज़ी से गिरते हैं platlets बढ़ाने के लिए बकरी का दूध या देसी पपीते के पत्ते तोड़ने पर जो दूध निकलता है या पपीते के कोपल पत्ते भी platlets बढ़ाने में सहायक होते हैं. savliv drops की 8 बूंदे तेज़ गर्म पानी में दिन में तीन बार देने पर डेंगू बुखार में अत्यंत प्रभाव होता है, बुखार में कमी आती है, डेंगू के लक्षणों में आराम मिलता है और जो blood platlets घट रहे हैं वेह तेज़ी से बढ़ते हैं. savliv drops द्वारा डेंगू के काफी मरीजों का उपचार किया गया है.

Ascites Problem

लीवर सिरोसिस में जब ascites/पेट में पानी की प्रॉब्लम आने लगती है तो मरीज की देखभाल में काफी सावधानी की आवश्यकता  होती है, पेट में कम से कम पानी बने इसके लिए मरीज़ को 1 से सवा लीटर पानी पीने के लिए कहा जाता है, साथ में नमक कम लेने के लिए कहा जाता है. जब मरीज़ को नमक कम करने के लिए चिकित्सक कहते हैं तो देखने में आया है की कुछ मरीज़ नमक का सेवन बंद कर देते हैं यह गलत है ascites के मरीज़ को लगभग 2 gm. नमक लेना ही चाहिए, नमक को बंद नहीं करना चाहिए क्यूंकि अगर नमक बिलकुल बंद कर दिया जाता है तो सोडियम लेवल भी घटने लगता है, जिससे मरीज़ में अन्य विकार उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है. मरीज़ को घी और मक्खन रहित सुपाच्य भोजन करना चाहिए, भोजन में सुपाच्य प्रोटीन जैसे राजमा, मूंग की छिलके वाली दाल, सोयाबीन का पनीर (Tofu), गाय का दूध, प्रोटीन डाईट के रूप में फायदेमंद है. रेड मीट और अल्कोहल आदि अप्द्रव्यो का सेवन अत्यंत घातक है.

ascites में प्रोटीन लेवल घटने लगता है जिसमे albumin और globulin का ratio बिगड़ता है savliv drops इस A:G ratio को बढ़ाने का काम करती है,  इसकी 8 बूँद सुबह और 8 बूँद शाम सेवन से albumin धीरे धीरे बढ़ता है और globulin उचित लेबल पर आकर A:G ratio भी बढ़ता  है.

PORTAL HYPERTENSION.

जब लीवर की सतह हार्ड इर्रेगुलर हो जाती है तो यह लीवर की गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है. लीवर की बारीक नसे जिनमे से खून गुज़रकर भोजन में से सोखी गई भोजन सार, कार्बोहाइड्रेट, फैट, और प्रोटीन आदि पोषक तत्वों  की संचय और अपचय की प्रक्रिया बाधित होने लगती है और लीवर में से खून का प्रभाव जो की पोर्टल वेन के द्वारा होता है रुक जाता है और पोर्टल वेन पर दबाव बढ़ जाता है और यह फूलने लगती है इसके कारण पोर्टल वेन के दबाव के कारण से आहार नाल एवं आंतो की नसे फूलने लगती हैं, और कभी कभी फट भी जाती हैं जिसके कारण यदि आहार नाल की नस फटती है तो खून की उलटी होती है और आंतो में कोई नस फटती है तो मल में खून आता है जिसका इलाज डॉ. फूली हुई नसों में रिंग का सपोर्ट देकर फटने से बचाते हैं और लीवर की नसे बंद रह जाती है.

savliv drops के anti oxident’ गुणो के कारण देखने में आया है की पोर्टल हाइपरटेंशन घटता है संभवतः लीवर की बंद नसे खुलने लगती हैं और मल के साथ खून आना या खून की उलटी होने की सम्भावना नहीं रह पाती क्यूंकि आहार नाल एवं आंतो की नसे फूलनी बंद हो जाती है.

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