Beginning of Harshul Ayur Pharma

हर्षुल आयुर फार्मा ने दिसम्बर 2007 में अपनी वेबसाइट  www.harshulayurpharma.com प्रसारित की जिसको देखकर डॉ. सरवन बाबू चिदंबरम प्रभावित हुए और उन्होंने सन 2009 में  ईमेल के माध्यम से savliv drops पर कार्य करने की इच्छा प्रकट की. उनका मेल मिलने के पश्चात मै विमल कुमार और मेरे पुत्र शिवम् अगरवाल चेन्नई जाकर डॉ. सरवन बाबू से मिले और savliv drops पर अनुसंधान कार्य करने के लिए सहमति हुई और सरवन बाबू ने एक प्रोजेक्ट बनाकर सरकारी सहायता के लिए Department of Science & Technology भारत सरकार दिल्ली के समक्ष प्रस्तुत किया. जिसको विमल कुमार की चिकित्सीय योग्यता की कोई डिग्री ना होने के कारण Department of Science & Technology की कमिटी ने अस्वीकृत कर दिया जिसको अगली मीटिंग के लिए डॉ. सरवन बाबू ने जो की डिपार्टमेंट  टॉक्सिकोलॉजी, रामचंद्र यूनिवर्सिटी के हेड हैं ने कमिटी के समक्ष  पुनः प्रोजेक्ट दिया जिसको कमिटी ने पुनः अस्वीकृत कर दिया.

अब सारी आशा धूमल हो गई थी क्यूंकि अनुसंधान पर आने वाला खर्चा हर्षुल आयुर फार्मा अकेले वेहन करने में असमर्थ था और सरकारी सहायता के लिए प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं हो रहा था इसी मध्य एक घटना घटी कि एक पेट (कुत्ते का पिल्ला) संस्थान में कार्यरत डॉ. सरवन बाबू के सहयोगी वेटनरी चिकित्सक एवं अनुसन्धान कर्ता के पास अत्यंत गंभीर हालत में हेपेटिक कोमा की स्थिति में आया. डॉ. वेंकटेश के पास savliv drops का सैंपल रखा था तो उन्होंने उसी सैंपल में से एक खुराक उस पिल्लै को दे दी और उनके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा जब वह पिल्ला 15 मिनट बाद कोमा से बाहर आगया और तीन माह तक उसका इलाज किया तो वह पूर्णतयः स्वस्थ हो गया उक्त घटना को Department of Science & Technology के साइंटिस्ट जी. डॉ. समाथानम को अवगत कराई तो वह प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके.

अगली मीटिंग के लिए मुझे साक्षात्कार के लिए तेजपुर यूनिवर्सिटी में बुलाया गया जहां पर Department of Science & Technology की सहायता स्वीकृत करने वाली कमिटी के समक्ष मै प्रस्तुत हुआ और कमिटी मेरे लीवर से सम्बंधित साधारण ज्ञान देखकर काफी प्रभावित हुई और इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी. 19 जुलाई 2012 को इस प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ हुआ और 11 फरवरी 2016 को यह प्रोजेक्ट सम्पूर्ण होने पर DST की मीटिंग में संतोष ज़ाहिर किया गया और कार्यवाही में ख़ुशी ज़ाहिर की गई कि savliv drops का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है.

मीटिंग में savliv drops से सम्बंधित मिनट नीचे दिए गए हैं.img359

MIGRAINE

Migrano- आयुर्वेदिक शास्त्रों में कई ऐसी औषधियों का उल्लेख आया है जो की स्पर्श मात्र से अपना प्रभाव दिखाती हैं, स्पर्श मात्र से कई व्याधियो में अपना प्रभाव दिखाती हैं, और बीमारियों को ठीक करती हैं. इन्ही में से एक औषधी Htereoseermum Chelonoides Dc  (परारी) है. भावप्रकाश निखंटू में लिखा है इसके फली के टुकड़े को बाँधने पर यह अधकपारी में बहुत लाभकारी है. क्यूंकि प्रयोग अति सरल था, और अधकपारी अर्थात Migraine के रोगी की संख्या बहुत अधिक है सोचकर इसका प्रयोग हमने Migraine के मरीजों पर करना प्रारंभ किया.

क्यूंकि यह औषधि खाने के लिए नहीं है केवल त्वचा से स्पर्श की जाती है तो इसका साइड इफ़ेक्ट होने की कोई सम्भावना ही नहीं है अतः हमने लोगो के ऊपर प्रयोग किया जिससे हमने पाया कि लगभग 80% लोगो को इससे पूर्ढ़तयः लाभ हुआ.

अतिसुगमत से उपलब्ध मूल्य में नगण्य होने के कारण जन कल्याण की द्रष्टि से हमने इसको निःशुल्क देना ही स्वीकार किया. इसको प्राप्त करने के लिए आपको अपना पूरा पता लिखा हुआ लिफाफा उचित डाक स्टाम्प लगा हुआ हमें भेजे जिससे हम यह औषधि रखकर आपको पोस्ट कर सके.

प्रयोग- इसको प्रयोग करने की विधी अत्यंत साधारण है. शरीर के किसी भी भाग में जैसे गले में पहनने वाली चैन में, हाथ की घड़ी के पट्टे पर या शरीर के किसी भी भाग में इस तरह बंधे के ये त्वचा को स्पर्श करती रहे.

Liver Health

पेट के ऊपरी हिस्‍से में कोन के आकार का, भूरा अंग पाया जाता है जिसे लिवर के नाम से जानते है, यह मानव शरीर का सबसे महत्‍वपूर्ण अंग होता है। यह अंग शरीर में लगभग 500 काम करता है। यह शरीर का सबसे बड़ा हिस्‍सा होता है, अगर इसमें किसी भी प्रकार का कोई संक्रमण होता है या इसे क्षति होती है तो शरीर में कई लक्षण एक साथ दिखने लगते है। इस तरीके की समस्‍या, इंसान की लतों और गंदी आदतों जैसे – धूम्रपान, शराब आदि के कारण बहुत होती है। लिवर डैमेज के बारे में डॉक्‍टर कई टेस्‍ट के बाद ही बताते है लेकिन अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है तो शीघ्र ही डा. से सम्‍पर्क करें। लिवर डैमेज होने के लक्षण निम्‍म प्रकार हैं : लीवर की खराबी होने के लक्षण
1) पीला पड़ना : लि‍वर में किसी भी प्रकार की कोई भी समस्‍या होने पर सबसे पहले शरीर में पीलापन आने लगता है। त्‍वचा, नाखून और आंखों में पीलापन आ जाता है। यहां तक कि पेशाब में पीलापन आता है। ऐसा शरीर में उच्‍च बाईल के कारण होता है। अगर शरीर में लिवर सही ढंग से काम नहीं करता है, तो बाईल तेजी से बनता है और शरीर के कुछ अंगों में उसका असर दिखने लगता है। अगर आपके नाखूनों, स्‍कीन और आंखों में पिछले कुछ दिनों से पीलापन बढ़ता जा रहा हो, तो तुरंत डा. के पास जाएं। Symptoms of liver damage 2) मतली आना : लिवर खराब होने पर इंसान को हर समय घबराहट महसूस होती है और उसे मतली आती रहती है। जब बॉडी में बाईल की मात्रा ज्‍यादा हो जाती है तो उल्‍टी महसूस होना स्‍वाभाविक होता है। ऐसे में आपको डा. को दिखाकर फटाफट दवा खाना शुरू कर देना चाहिये। ये एक गंभीर मामला होता है और इसमें लेटलतीफी न करें। 3) पेट में सूजन आना : लि‍वर खराब होने पर पेट में सूजन बढ़ने लगती है और वह मोटा दिखता है। इस स्थिति में आपको काफी दिक्‍कत होती है। हर समय पेट में एक्‍ट्रा भारीपन लगता है। इस कंडीशन को गैस प्रॉब्लम आदि समझकर इग्‍नोर न करें। ये क्रिटिकल स्‍टेज हो सकती है। 4) नींद आना : लि‍वर खराब होने की स्थिति में व्‍यक्ति को हमेशा आलस्‍य सा लगता रहता है, उसे किसी काम को करने में मन नहीं लगता है जिसकी वजह से उसे हमेशा नींद सताती है। मरीज सही तरीके से किसी भी बात पर प्रतिक्रिया नहीं करता है। ज्‍यादा आलस्‍य आने पर और पेट में लगातार दर्द होने की स्थिति समान्‍य नहीं होती है, ध्‍यान दें। 5) मानसिक दिक्‍कतें : लिवर खराब होने की शुरूआत में सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक दिक्‍कत भी होती है, क्‍योंकि ब्रेन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। ब्रेन तुंरत रिस्‍पॉन्‍स नहीं कर पाता है और मरीज हमेशा कन्‍फ्यूजन में रहता है। ऊपर दिए गए सभी लक्षणों के साथ ये लक्षण होने पर समझ लें कि आपके लिवर में कुछ ठीक नहीं है, डा. के पास जाएं। 6) कोमा : आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि लिवर खराब होने पर व्‍यक्ति कोमा में भी जा सकता है। ऐसे में चूक न करें।

 

Save Liver Save Life

आज के समय में मिलावट की समस्या आम हो चली है , बाज़ार में किसी भी शुद्ध खाद्य पदार्थ का उपलब्ध होना काफी मुश्किल है I इसके अतिरिक्त चारोंओर जंक फ़ूड ही जंक फ़ूड , रहने खाने के तरीके ही बदल गए हैं , थाली में फाइबर फ़ूड गायब हो चूका है I बाज़ार में उपलब्ध मिल का आटा बिल्कुल चोकर या फाइबर रहित है I इसी के कारण दिन प्रति दिन लीवर से सम्बंधित बीमारियों के रोगी बढ़ते ही जा रहे है I लीवर को रुग्ण करने में शराब अलकोहल, सिगरेट एवं औषधियों के दुस्प्रभाव भी कारक कम नहीं हैं I
यूँ तो प्रारंभ में जब लीवर की कोई बीमारी प्रारंभ होती है तो कोई विशेष परेशानी नहीं होती I मुख्यत प्रारम्भ में भूख ,गैस एसिडिटी , कब्ज आदि साधारण से लक्षण दिखायी देते हैं I जिन्हें हम अनदेखा करके ध्यान नहीं देते I इन साधारण समस्याओं के समय जब आप अपने लीवर के टेस्ट करवायेगे तो सब नार्मल होंगे लेकिन समस्या बनी रहेगी I जब लीवर कुछ अधिक बीमार होगा तो फिर लीवर फंक्शन टेस्ट में एंजाइम जैसे S.G.P.T, S.G.O.T,G.G.P.T, Alkaline phosphate, Serum Bilirubine आदि बढ़ने लगते हैं I
इस स्थिति में उचित निदान और उपचार के अभाव में रोग बढ़ने लगता है I अल्ट्रा साउंड करवाने पर लीवर का साइज़ बढ़ा हुआ आता है जिसको हेपेटाइटिस भी कहते हैं I धीरे धीरे लीवर के काम करने की क्षमता घटने लगती है और लीवर प्रोटीन का पाचन नहीं कर पाता तो एकदम वजन घटना प्रारम्भ हो जाता है जो कि प्रोटीन टेस्ट में दिखाई देता है I प्रोटीन इसका लेवल 7 नार्मल होता है , इसके दो अवयव होते हैं I 1. एलबुमिन 2. ग्लोब्लिन I लीवर की बिमारियों में एल्ब्यूमिन घटने लगता है और ग्लोब्लिन बढ़ने लगता है I जो लीवर बढ़ा हुआ आता था अब कोर्स्र इकोटेचर, इरेगुलर सरफेस या सिकुढ़ा हुआ आने लगता है i यह लीवर की भयानक बीमारीका रूप ले लेता है और मरीज के पेट में पानी भरने लगता है , डॉक्टर मरीज की आयु की घोषणा करने लगते हैं कि अब तुम्हारी आयु इतने …..सीमित समय की शेष है i इलाज केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही बचा हैI
उपचार में मरीज को रेस्ट देना और परहेज करवाना हॉस्पिटल में एडमिट मुख्य उद्देश्य होता है i मरीज को यह लगता रहे कि मेरा उपचार बहुत अच्छे तरीके से हो रहा है , प्रतिदिन टेस्ट करवाये जाते हैं और उसकी जेब पर डांका डाला जाता है I यदि पेट में पानी बढ़ जाता है वह सुई लगाकर निकाल दिया जाता है , जिससे मरीज के पेट में कुछ तनाव काम होकर आराम मिलता है I
SAVLIV drops उपरोक्त सभी परिस्थितियों में काम करती है I
1. यह पेशाब को बढ़ाकर पेट में भरे हुए पानी को कम करने लगती है I
2. नए पानी को बनने से रोकती है
3. सीरम बिलिरुबिन के लेवल को कम करती है I
4. एल्ब्यूमिन लेवल को बिना बाहर से चढ़ाये धीरे धीरे बढ़ाती है I
5. ग्लुब्लिन लेवल को सही कर ए जी रेश्यो को बढ़ाती है I

Liver Cirrhosis

माननीय अभिताभ बच्चन शतायु हों I अक्सर सुनने में आता है कि अभिताभ जी का लीवर केवल पच्चीस प्रतिशत कार्य कर रहा हैI आप उनकी सक्रियता देखते हैं ही, उनको भी लीवर सिरोसिस है , ऐसा सुनने में आता है I जब कोई मरीज जो कि सिरोसिस से पीढ़ित है और उसे asitis के लक्षण यानि कि पेट में पानी भरने लगता है तो विद्वान चिकित्सक उसको उसकी आयु बताने लगते हैं कि अब आपकी केवल तीन मास ,या छः मास या एक साल आयु शेष है I ऐसे मरीज जब मुझसे बात करते हैं तो मैं उनसे मजाक में पूछता हूँ कि आपने क्या उन चिकित्सक महोदय से पूछा कि आपकी कितनी आयु शेष है I मरीज मुस्कराने लगता है
हानि लाभ , जीवन मरण , यश अपयश विधि हाथ ऐसा रामचरित मानस में संत श्री तुलसी दास जी ने कहा है
मृत्यु तो कटु सत्य है जिसने तो होना ही है , लेकिन कोई किसी की मृत्यु की भविष्यवाणी नहीं कर सकता I पिछले दिनों मैं जब मुंबई गया तो मेरे एक मरीज के पुत्र श्री सतीश खरप ने कहा मैं आपको इसलिए सम्मान देता हूँ ,क्योंकि आपके कारण मैं अपनी माता जी के साथ सात वर्ष अधिक रह पाया और आगे बताया कि जिस समय savlivdrop मुझे प्राप्त हुई थी उस समय डॉक्टर ने केवल आधे घंटे की उनकी आयु बतायी थी I
इसी प्रकार की घटना तब घटी जब मैं अपने पुत्र से मिलने के लिए देहरादून गया I क्योंकि मैं राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ का स्वयमसेवक हूँ इसलिए देहरादून आने पर राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ के प्रांतीय कार्यालय पर अवश्य जाता हूँ I मैंने वहाँ पर परम पूजनीय डा o नित्यानंद जी को गुरु रामरॉय मेडिकल कोलेज से वापिस कर कह दिया था कि अब इनकी स्रेवा कार्यालय पर ही कर लें I डा o नियानंद जी मेरे मार्ग द्रष्टा रहे थे I उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी Iउनके हाथ पैरों में सुजन कहना तो उचित न होगा बल्कि पानी भरा हुआ था I सब कुछ कार्य पलंग पर ही हो रहा था I उनको तकियों का सहारा देकर बैठा रखा था और एक स्वयंसेवक उन्हें दलिया खिला रहा था I जब स्वयं सेवक दलिया खिलाकर कमरे से बाहर आये तो मैंने उन्हें SAVLIV DROPS दी और डा o साहब को प्रतिदिन देने का आग्रह किया I और मैं वापिस गया I
मैं पुन : तीन पश्चात् गया तो पालथी मार कर बैठे हुए डॉoसाहब बैठे अपने हाथ से दलिया खा रहे थे उस समय डाoसाहब की आयु लगभग 92 वर्ष की थी i इस घटना के पश्चात् डॉo साहब ने लगभग दो वर्ष का जीवन चलते फिरते व्यतीत किया और इसके पश्चात् दो माह पूर्व वे हम सब से विदा लेकर वह कर्म योगी इस संसार से विदा हो गया I इसी कारण से मेरा कहना है कि कोई किसी की आयु नहीं बता सकता चाहे वह डॉक्टर हो या ज्योतिष I

LIVER PROBLEM

गर्मियों का मौसम आगया है इसमें दूषित पानी मछरो के काटने और विभिन्न कारणों से विभिन्न तरह के बुखार अपना प्रकोप दिखाने लगते हैं. इन बुखारो को नियंत्रित करने के लिए सामान्यतः peracitamol और अन्य बुखार को नियंत्रण करने वाली औषधियां दी जाती हैं जिनका असर लीवर के ऊपर होता है और लीवर बीमार होने लगता है एक नया रोग जन्म लेता है जिसे पीलिया कहते हैं. इसमें आँखे पीली, शरीर का रंग पीला दिखाई देने लगता है यह आँखों एवं शरीर का पीला रंग खून के अन्दर रेड सेल के टूटने पर एक पदार्थ बनता है जिसको billirubin कहते हैं, खून में billirubin की मात्र बढ़ने से खून का रंग पीला होने लगता है खून के रंग के ही कारण हमारे शरीर गुलाबी रंग लिए हुए होता है वह रंग बदलकर पीला दिखाई देने लगता है. प्रायः लोग इस पीले रंग से डरने लगते हैं और पीली चीजों का सेवन बंद कर देते हैं जैसे ख़ास तौर से हल्दी को बंद कर दिया जाता है. भोजन की थाली से हल्दी का परहेज सबसे अधिक होता है. जबकि आयुर्वेदिक शास्त्र भावप्रकाश में हल्दी को यकृत विकार में उपयोगी लिखा है पता नहीं कहा से समाज में हल्दी के परहेज की गलत धारणा चल चुकी है जबकि हल्दी पीलिया रोग में भावप्रकाश के अनुसार एक औषधि का काम करती है.
पीलिया रोग (jaundice) में seerum billirubin जिसका मानक 1% तक नार्मल होता है से बढ़ने लगता है यह billirubin बढ़ता है तो लीवर में से अन्य toxic enzyme SGPT, SGOT, Alkaline Phosphate आदि भी बढ़ने लगते हैं. यदि serum billirubin का मानक 20% से ऊपर जाने लगता है तो जीवन खतरे में मानने लगते हैं इस स्थिति में रोगी के शरीर का रंग पीला आँखे अत्यधिक पीली किसी भी चीज़ का ना पचना हर समय जी का मचलना उलटिया होना और शरीर में खाज होना लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इस स्थिती में लीवर या यकृत अत्यंत बीमार होता है , allopathic चिकित्सा के अनुसार माना जाता है कि शरीर को विश्राम देना ही मुख्य उपचार है क्यूंकि इस स्थिती में उपचार के लिए कोई allopathic औषधी भी नहीं है जबकि आयुर्वेद में यकृत विकार पर औषधियों का भण्डार है. आयुर्वेद के प्रणेता ऋषियों ने इस घातक बीमारी पर गहन अध्ययन किया होगा और आयुर्वेदिक शास्त्रों में वर्णित सेंकडो औषधियां आयुर्वेदिक ग्रंथो में उपलब्ध हैं और सफलता पूर्वक पीलिया (jaundice) या लीवर के कई अन्य बीमारियों में सफलतापूर्वक उपचार कर रही हैं जिनमे से एक हमारे द्वारा निर्मित SAVLIV DROP है जिसको इस प्रकार के रोगी को देने पर serum billirubin एवं अन्य toxic enzyme अविलम्ब नियंत्रण में आते हैं. रोगी को आरही समस्याओं जेसे जी मचलना, उलटी होना, और बदन की खुजली में अविलम्ब राहत पहुँचती है और रोगी स्वस्थता की ओर आने लगता है यदि लीवर खाली बढ़ा हो उसमे CIRRHOSIS ना हुई हो केवल अभी पीलिया रोग से ही पीड़ित हो तो पीलिया एक महीने के अंदर ठीक हो जाता है.
For Contact-
Head Office Address
Harshul Ayur Pharma
Contact Person: Vimal Kumar
Address: Bambagher , Ramnagar -244715 (Nanital) Uttrakhand, India
Phone: +91-251720
Mobile: +91-9837057416
email: harshulayurpharma@gmail.com, savlivdrops@gmail.com

SAVLIV DROPS

क प्रश्न मुझे हमेशा उद्वेलित करता रहता कि हमारा लीवर एवं किडनी जैसे महत्त्व पूर्ण अंग अधिक आवश्यक हैं अथवा शुगर लेवल का मेंटेन रहना ?
अधिकतम शुगर कंट्रोल करने वाली औषधियों का दुष्प्रभाव लीवर और किडनी पर होता है I जिसके कारण अधिकतर देखा गया है कि Serum ceatinin लेवल बढ़ने लगता है और किडनी बीमार होनी प्रारम्भ हो जाती है I
daibetese बीमारी में विकट समस्या उस समय आ जाती है जब शुगर लेवल तो नार्मल होता है लेकिन घाव ठीक नहीं होते , इस स्थिति में शारीर की प्रतिरोधक क्षमता नगण्य हो जाती है और किसी भी प्रकार के एंटी-बोयोतिक असर नहीं करते हैं तो केवल अंग भंग करने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं रहता I
इस परिस्थिति में savliv drops एंटी –ओक्सिडेंट का प्रमुख श्रोत कारण शारीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर घाव ठीक करने में सहयोग करती है I यदि इसके साथ बेल पत्र , तुलसी , काली मिर्च 4 , 2 , 1 भाग के अनुसार पीस कर गोली बनाकर देने से निश्चित ही लाभ मिलता है और अंग भंग की समस्या टाली जा सकती है I

An anecdote of a desperate father.

In 2001, my baby boy was born in Krishna Hospital at Haldwani. The baby’s weight was normal at the time of delivery. After remaining hale and hearty for only 3 days, suddenly the baby developed fever. So I look him to pediatric physician, Dr. Anil Agarwal, who examined him and administered necessary medicine, but continuously administering for as long as 25 days, the fever remain constant without any change.

Depressed and utterly confused with the ailing condition of the new-born, I took him to pediatric specialist Bareilly, then Moradabad, Lucknow and finally PGI Chandigarh, but as ill luck of it, the condition of baby remained unchanged, suffering constantly with fever. As the baby was advancing in age, the baby gradually stopped taking milk and other food supplements causing reduction in shape and size quite lean and thin.

Finding no solution elsewhere and leaving at the fate of the new born, I came to Ramnagar remedial measure and started job as sales man in the company of one Sri Vimal Kumar, whom I narrated the whole episode of baby’s condition.

Benevolent and kind hearted in nature, Sri Vimal Kumar himself contacted the local practicing physicians and consulted about the prevailing condition of the baby. But was all in vain. By then, the baby became two years old, but neither he used to drink milk nor any food supplements, resulting in bony frame.  Only he used to drink plenty of water, which was keeping him alive. His abdomen and bowels was very hard, making him difficulty in defecation and was frequently resorted to inserting enema.

Finally, as a last resort, one day Sri Vimal Kumar, Managing Director of Harshul Ayur Pharma gave me the medicine, as a trial, to be administrated to the baby-boy and accordingly I started dispensing as per his directions.

To my utter surprise, the drug-therapy started showing positive signals.  First of all the stomach and bowels set in motion and started cleaning the accumulated waste.  There after the boy started drinking milk and taking food suppliments and gradually day after day, his general health began improving.

It is quite unbelievable and surprising that a no. of Senior specialist consulting physicians to whom the baby-boy was got examined and treated have utterly failed to get the baby cured, whereas administration of “SAVLIV DRUG” therapy of Harshul Ayur Pharma, Ramnagar Nainital, owned by Sri Vimal Kumar has given an amazing and miraculous  result within a shortest period.

Today, my this baby-boy is teenager of 12 years, now having round health, due to this wonderful drug therapy.

Accordingly I myself and my family owe our sincere thanks and gratitude to this angelic persona.

Chandrashekhar Papne.

Bharatpuri,

Near Great Mission School,

Ramnagar-244715

(Distt. Nainital)

 

A Story of a Six months old baby girl, who was suffering from “Cirrhosis of Liver”.

This is one of my client’s story, which is very close to my heart and hence I would like to share it with you all.

The story is about a six month’s tiny baby girl, who was suffering from “Cirrhosis of Liver” disease due to hyper billirudinia.
Her family came to know about the disease only after getting the liver biopsy test conducted & detection that she was suffering severely from cirrhosis of liver after another six months.
As it’s for anyone it was shocking news for the family. Her father immediately started making enquiries and contacting with each and every renowned doctors of all the prestigious medicalcollages and hospitals of Delhi. It was very distressing for her father that he was not getting any satisfactory and positive response from any physician doctors for her daughter’s well being.
Finally after a long research and clicking on internet portal for any medical clue came to know about Harshul Ayur Parma’s herbomineral formulation drug “SAVLIV DROPS”.
The girl’s father immediately rung me up and briefed about baby girl’s ailing condition. The every word of conversation with her father, Mr. Amrendra Anand is still echoing in my ear.
Completely assured and trusting, he placed order for our herbomineral drug “SAVLIV DROPS” and after a few days of dispensation of the drug therapy, positive results getting visible and the baby girl felt immense relief in her itching problem gradually her billirubin level started coming down. By the time she also started walking and above all her health started showing sign of improvement constantly. Now she is two and half years “SAVLIV BABY”.
We are really thankful to the almighty’s profuse blessings and good wishes of all of you for your faith and trust, which provide an extra encouragement and zeal to continue, further our innovative research programs.
Such stories give an extra zeal, an encouragement and a spirit of inspiration to our venture.
Further, we urge and request to all of you, please share and send us your feedback about “SAVLIV DROPS”.

Vimal Kumar. Director. HARSHUL AYUR PHARMA. RAMNAGAR-244715 Cont-+919837057416.
website-:www.harshulayurpharma.com

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One of a heart touching story of a son who’s words still echoing in my mind.

Dear Readers,

I am really thankful that you like my recent article where I shared
“A Story of a Six months old baby girl, who was suffering from “Cirrhosis of Liver”. Your appreciation and god remarks have given me strength to share another story with all of you.This story is about a mother who was suffering from liver disorder since 2003. She was admitted in a major hospital in June 2007. Where she was diagnosed “Liver Cirrhosis”.The most unfortunate thing in the whole story is that doctor told them that there was no medicine available in this world for “Liver Cirrhosis treatment and given discharge from the hospital and told his son that his mother will not remain with her for no longer time. This was the most troublesome words for his son Mr. Satish Khadap.In the mean while his son consulted with many other doctors but did not get positive assurance. Finally he started searching over the internet after long research and clicking on the internet portal for any medical clue came to know about Harshul Ayur Pharma’s Herbomineral Formulation drug “SAVLIV DROPS”.

Then he contacted me on phone, and told me about her mother’s condition. When he was sharing the details of her mother I clearly felt the concern for her mother in his son’s voice.

After the discussion, he place the order as her mother was serious; I send him 3 bottles of Savliv Drops. And the best part was “Savliv Drops” showed his positive results on his mother within 8 days and her mother started taking food and after 45 days she started walking with support.

In 2012 she got relief and started taking proper diet and not having any problem related to liver.

Her son’s word still echoing in my mind that “Vimal Sir I spend 7 more year with my mother due to SAVLIV DROPS”. These wonderful words and success stories inspire me to continue my research work on “Savliv Drops”.

I am thankful to the almighty that he made me capable to help the society to some extent.

If you have experienced something with “Savliv Drosps” I would be glad to read that.

Vimal Kumar.

Director.

HARSHUL AYUR PHARMA.
RAMNAGAR-244715