Jaundice & Turmeric

पीलिया (jaundice) या कामला लीवर की बीमारी है, इस बीमारी में रक्त के लाल रक्त कोशिकाए का टूटना अधिक हो जाता है और यह लाल रक्त कोशिकाए  टूटकर एक बिलिरुबिन नामक द्रव बनाते हैं I यूँ तो यह लाल रक्त कोशिकाए टूटती रहती हैं और नई बनती रहती हैं अतः रक्त में बिलिरुबिन प्रायः पाया ही जाता है और इसका सामान्य स्तर 1% से कम होता है लेकिन जब रक्त कोशिकाए सामान्य से अधिक टूटने लगती हैं तो बिलिरुबिन का प्रतिशत बढ़ जाता है और बिलिरुबिन का रंग पीला होने के कारण खून का रंग भी पीला होने लगता है इसका प्रभाव यह होता है कि पीलिया से ग्रसित व्यक्ति की आँखे नाखून हथेली का रंग पीला दिखाई देने लगता है I रोगी अत्यधिक कमजोरी महसूस करता है, व्यक्ति पीला लगने लगता है क्यूंकि इसका असर यकृत पर होता है और यकृत बीमार होने लगता है परिणामस्वरूप  भूंख लगना बंद हो जाती है, रोगी का जी मिचलाता है उल्टिया होने लगती हैं और रोगी बहुत बेचैनी एवं कमजोरी महसूस करता है I

पीलिया के उपचार के लिए गाँव कस्बो में लोग झाड़ फूँक का सहारा लेते हैं किसी हद तक इससे लाभ भी होता है क्यूंकि वैज्ञानिको का मानना है कि लीवर स्वयमेव भी मानसिक चिकित्सा से भी अपना उपचार स्वयं करने की क्षमता रखता है लेकिन यदि पीलिया का असर लीवर पर अधिक हो जाये तो यह मानसिक चिकित्सा कारगर नहीं होती है I

पीलिया होने पर लोग पीली वस्तुओ से परहेज़ करने लगते हैं, झाड़-फूँक करने वाले पीले वस्त्रो तक का परहेज़ बता देते हैं और हल्दी का परहेज़ बताते हैं जबकि आयुर्वेदिक ग्रन्थ भावप्रकाशनिघंटु में हल्दी को पीलिया की औषधि कहा गया है I यह भ्रान्ति कहाँ से प्रारंभ हुई कहना कठिन है, पीलिया में हल्दी का परहेज़ कभी नहीं करना चाहिए I

पीलिया में SAVLIV DROPS भी पहली खुराक देते ही जी मिचलाना, उल्टिया होना बंद हो जाता है और मरीज़ को एक-दो दिन में भूंख भी लगने लगती है और सामान्य पीलिया प्रायः सात-आठ दिन में बिलकुल ठीक हो जाता है और बिलिरुबिन का स्टार 1% से कम हो जाता है I

पीलिया में घी, तला भुना घरिष्ट भोजन, फ़ास्ट फ़ूड आदि बिलकुल नहीं लेने चाहिए बल्कि स्वच्छता से निकाला गया गन्ने का रस, मूली, पालक, हरी सब्जियां आदि लेनी चाहिए I

Jaundice in New Born Baby.

नवजात शिशुओ में पीलिया होना बहुतायत से पाया जाता है लगभग 70-80% नवजात शिशुओ में पीलिया 24 घंटे से 7 दिन के बीच में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जब शिशु जन्म लेता है तो उसके शरीर में रेड सेल्स की मात्रा बहुत अधिक होती है और जब यह रेड ब्लड सेल्स टूटने लगते हैं तो इनके टूटने से खून में billurubin की मात्रा बढ़ने लगती है जिसका रंग पीला होता है और इसी कारण बच्चें की त्वचा का रंग पीला दिखाई देने लगता है, आँखे व नाखून भी पीले दिखाई देने लगते हैं  I लीवर की अपरिपक्व्ता के कारण यह billurubin गुर्दों एवं यकृत द्वारा साफ़ नहीं हो पाता है अतः खून में billurubin बढ़ जाता है और खून का रंग पीला होने के कारण उपरोक्त लक्षण दिखाई देने लगते हैं I सामान्यतः बच्चो में पीलिया होना स्वाभाविक कारण है , फिर भी यह रोग ना बढ़े के लिए सावधानी बरतना ज़रूरी है I इसके लिए बच्चे को प्रातः काल की सुनहरी धूप लाभदायक होती है I तेज़ धूप में बच्चे को नहीं रखना चाहिए I

कुछ वर्ष पहले जाँन हापकिंस  विश्वविद्यालय में सिद्ध किया था की billurubin एक शकित्शाली ओक्सिडेंट है यह बच्चो की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है इसलिए पीलिया कोशिकाओ के नुकसान के विरुद्ध एक रोध की तरह कार्य कर सकता है लेकिन पीलिया के लिए उचित देखभाल की जानी चाहिए I

क्यूंकि जाँन हापकिंस  विश्वविद्यालय ने सिद्ध किया कि यह billurubin एक शक्तिशाली ओक्सिडेंट है, को शांत करने के लिए Savliv Drops अत्यंत प्रभावी होनी चाहिए क्यूंकि Savliv एक एंटी-ओक्सिडेंट औषधि है जिसमे फिनोलिक कंपाउंड, टेनिन, फ्लोवोंस, विटामिन सी और विटामिन ई, एंटी-ओक्सिदेंट्स तत्व हैं इसी के साथ ही हाइड्रोजन पेरोक्साइड और नाइट्रिक एसिड दोनों के एक-एक ऑक्सीजन फ्री रेडिकिल हैं जो कि billurubin की ओक्सिडेंट शक्ति को शांत कर लाभ पहुंचा सकता है, Savliv Drops को काफी नवजात शिशुओ को आधी बूँद देकर देखा गया कि नवजात शिशुओ को तुरंत लाभ हुआ और उनका billurubin लेवल सामान्य हुआ I

SAVLIV’ DROPS पर चले अनुसन्धान में पाया गया कि SAVLIV DROPS एक निरापद औषधि है, यानि कि जिसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है I

आधी बूँद की मात्रा करने के लिए दो चम्मच पानी में SAVLIV DROPS की एक बूँद मिलानी चाहिए और उसमे से एक चम्मच बच्चे को देनी चाहिए और एक चम्मच शिशु की माँ को दे देनी चाहिए I

DENGUE

डेंगू बुखार में सर में सामने की तरफ तेज़ दर्द, आँखों के पीछे तेज़ दर्द, मांसपेशियों व जोड़ो में असहनीय दर्द, छाती एवं बाहों पर खसरा की तरह दाने पड़ना, पेट में लगातार तेज़ दर्द, खाल का ठंडा पीला एवं सिकुड़ना, नाक मूह और मसूड़ो से खून आना, उलटी में खून आना, मल पेशाब में खून आना, रोगी को अत्यधिक घबराहट होना डेंगू के मुख्य लक्षण हैं. आयुर्वेद  के अनुसार 10 gm. खूब गला को 2 ltr. पानी में उबालकर साधारण यानी रूम temp. पर रख ले और यही पानी रोगी को पीने के लिए दे. डेंगू बुखार में blood platlets तेज़ी से गिरते हैं platlets बढ़ाने के लिए बकरी का दूध या देसी पपीते के पत्ते तोड़ने पर जो दूध निकलता है या पपीते के कोपल पत्ते भी platlets बढ़ाने में सहायक होते हैं. savliv drops की 8 बूंदे तेज़ गर्म पानी में दिन में तीन बार देने पर डेंगू बुखार में अत्यंत प्रभाव होता है, बुखार में कमी आती है, डेंगू के लक्षणों में आराम मिलता है और जो blood platlets घट रहे हैं वेह तेज़ी से बढ़ते हैं. savliv drops द्वारा डेंगू के काफी मरीजों का उपचार किया गया है.

Ascites Problem

लीवर सिरोसिस में जब ascites/पेट में पानी की प्रॉब्लम आने लगती है तो मरीज की देखभाल में काफी सावधानी की आवश्यकता  होती है, पेट में कम से कम पानी बने इसके लिए मरीज़ को 1 से सवा लीटर पानी पीने के लिए कहा जाता है, साथ में नमक कम लेने के लिए कहा जाता है. जब मरीज़ को नमक कम करने के लिए चिकित्सक कहते हैं तो देखने में आया है की कुछ मरीज़ नमक का सेवन बंद कर देते हैं यह गलत है ascites के मरीज़ को लगभग 2 gm. नमक लेना ही चाहिए, नमक को बंद नहीं करना चाहिए क्यूंकि अगर नमक बिलकुल बंद कर दिया जाता है तो सोडियम लेवल भी घटने लगता है, जिससे मरीज़ में अन्य विकार उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है. मरीज़ को घी और मक्खन रहित सुपाच्य भोजन करना चाहिए, भोजन में सुपाच्य प्रोटीन जैसे राजमा, मूंग की छिलके वाली दाल, सोयाबीन का पनीर (Tofu), गाय का दूध, प्रोटीन डाईट के रूप में फायदेमंद है. रेड मीट और अल्कोहल आदि अप्द्रव्यो का सेवन अत्यंत घातक है.

ascites में प्रोटीन लेवल घटने लगता है जिसमे albumin और globulin का ratio बिगड़ता है savliv drops इस A:G ratio को बढ़ाने का काम करती है,  इसकी 8 बूँद सुबह और 8 बूँद शाम सेवन से albumin धीरे धीरे बढ़ता है और globulin उचित लेबल पर आकर A:G ratio भी बढ़ता  है.

PORTAL HYPERTENSION.

जब लीवर की सतह हार्ड इर्रेगुलर हो जाती है तो यह लीवर की गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है. लीवर की बारीक नसे जिनमे से खून गुज़रकर भोजन में से सोखी गई भोजन सार, कार्बोहाइड्रेट, फैट, और प्रोटीन आदि पोषक तत्वों  की संचय और अपचय की प्रक्रिया बाधित होने लगती है और लीवर में से खून का प्रभाव जो की पोर्टल वेन के द्वारा होता है रुक जाता है और पोर्टल वेन पर दबाव बढ़ जाता है और यह फूलने लगती है इसके कारण पोर्टल वेन के दबाव के कारण से आहार नाल एवं आंतो की नसे फूलने लगती हैं, और कभी कभी फट भी जाती हैं जिसके कारण यदि आहार नाल की नस फटती है तो खून की उलटी होती है और आंतो में कोई नस फटती है तो मल में खून आता है जिसका इलाज डॉ. फूली हुई नसों में रिंग का सपोर्ट देकर फटने से बचाते हैं और लीवर की नसे बंद रह जाती है.

savliv drops के anti oxident’ गुणो के कारण देखने में आया है की पोर्टल हाइपरटेंशन घटता है संभवतः लीवर की बंद नसे खुलने लगती हैं और मल के साथ खून आना या खून की उलटी होने की सम्भावना नहीं रह पाती क्यूंकि आहार नाल एवं आंतो की नसे फूलनी बंद हो जाती है.

kindly visit- www.harshulayurpharma.com

Beginning of Harshul Ayur Pharma

हर्षुल आयुर फार्मा ने दिसम्बर 2007 में अपनी वेबसाइट  www.harshulayurpharma.com प्रसारित की जिसको देखकर डॉ. सरवन बाबू चिदंबरम प्रभावित हुए और उन्होंने सन 2009 में  ईमेल के माध्यम से savliv drops पर कार्य करने की इच्छा प्रकट की. उनका मेल मिलने के पश्चात मै विमल कुमार और मेरे पुत्र शिवम् अगरवाल चेन्नई जाकर डॉ. सरवन बाबू से मिले और savliv drops पर अनुसंधान कार्य करने के लिए सहमति हुई और सरवन बाबू ने एक प्रोजेक्ट बनाकर सरकारी सहायता के लिए Department of Science & Technology भारत सरकार दिल्ली के समक्ष प्रस्तुत किया. जिसको विमल कुमार की चिकित्सीय योग्यता की कोई डिग्री ना होने के कारण Department of Science & Technology की कमिटी ने अस्वीकृत कर दिया जिसको अगली मीटिंग के लिए डॉ. सरवन बाबू ने जो की डिपार्टमेंट  टॉक्सिकोलॉजी, रामचंद्र यूनिवर्सिटी के हेड हैं ने कमिटी के समक्ष  पुनः प्रोजेक्ट दिया जिसको कमिटी ने पुनः अस्वीकृत कर दिया.

अब सारी आशा धूमल हो गई थी क्यूंकि अनुसंधान पर आने वाला खर्चा हर्षुल आयुर फार्मा अकेले वेहन करने में असमर्थ था और सरकारी सहायता के लिए प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं हो रहा था इसी मध्य एक घटना घटी कि एक पेट (कुत्ते का पिल्ला) संस्थान में कार्यरत डॉ. सरवन बाबू के सहयोगी वेटनरी चिकित्सक एवं अनुसन्धान कर्ता के पास अत्यंत गंभीर हालत में हेपेटिक कोमा की स्थिति में आया. डॉ. वेंकटेश के पास savliv drops का सैंपल रखा था तो उन्होंने उसी सैंपल में से एक खुराक उस पिल्लै को दे दी और उनके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा जब वह पिल्ला 15 मिनट बाद कोमा से बाहर आगया और तीन माह तक उसका इलाज किया तो वह पूर्णतयः स्वस्थ हो गया उक्त घटना को Department of Science & Technology के साइंटिस्ट जी. डॉ. समाथानम को अवगत कराई तो वह प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके.

अगली मीटिंग के लिए मुझे साक्षात्कार के लिए तेजपुर यूनिवर्सिटी में बुलाया गया जहां पर Department of Science & Technology की सहायता स्वीकृत करने वाली कमिटी के समक्ष मै प्रस्तुत हुआ और कमिटी मेरे लीवर से सम्बंधित साधारण ज्ञान देखकर काफी प्रभावित हुई और इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी. 19 जुलाई 2012 को इस प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ हुआ और 11 फरवरी 2016 को यह प्रोजेक्ट सम्पूर्ण होने पर DST की मीटिंग में संतोष ज़ाहिर किया गया और कार्यवाही में ख़ुशी ज़ाहिर की गई कि savliv drops का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है.

मीटिंग में savliv drops से सम्बंधित मिनट नीचे दिए गए हैं.img359

MIGRAINE

Migrano- आयुर्वेदिक शास्त्रों में कई ऐसी औषधियों का उल्लेख आया है जो की स्पर्श मात्र से अपना प्रभाव दिखाती हैं, स्पर्श मात्र से कई व्याधियो में अपना प्रभाव दिखाती हैं, और बीमारियों को ठीक करती हैं. इन्ही में से एक औषधी Htereoseermum Chelonoides Dc  (परारी) है. भावप्रकाश निखंटू में लिखा है इसके फली के टुकड़े को बाँधने पर यह अधकपारी में बहुत लाभकारी है. क्यूंकि प्रयोग अति सरल था, और अधकपारी अर्थात Migraine के रोगी की संख्या बहुत अधिक है सोचकर इसका प्रयोग हमने Migraine के मरीजों पर करना प्रारंभ किया.

क्यूंकि यह औषधि खाने के लिए नहीं है केवल त्वचा से स्पर्श की जाती है तो इसका साइड इफ़ेक्ट होने की कोई सम्भावना ही नहीं है अतः हमने लोगो के ऊपर प्रयोग किया जिससे हमने पाया कि लगभग 80% लोगो को इससे पूर्ढ़तयः लाभ हुआ.

अतिसुगमत से उपलब्ध मूल्य में नगण्य होने के कारण जन कल्याण की द्रष्टि से हमने इसको निःशुल्क देना ही स्वीकार किया. इसको प्राप्त करने के लिए आपको अपना पूरा पता लिखा हुआ लिफाफा उचित डाक स्टाम्प लगा हुआ हमें भेजे जिससे हम यह औषधि रखकर आपको पोस्ट कर सके.

प्रयोग- इसको प्रयोग करने की विधी अत्यंत साधारण है. शरीर के किसी भी भाग में जैसे गले में पहनने वाली चैन में, हाथ की घड़ी के पट्टे पर या शरीर के किसी भी भाग में इस तरह बंधे के ये त्वचा को स्पर्श करती रहे.

Liver Health

पेट के ऊपरी हिस्‍से में कोन के आकार का, भूरा अंग पाया जाता है जिसे लिवर के नाम से जानते है, यह मानव शरीर का सबसे महत्‍वपूर्ण अंग होता है। यह अंग शरीर में लगभग 500 काम करता है। यह शरीर का सबसे बड़ा हिस्‍सा होता है, अगर इसमें किसी भी प्रकार का कोई संक्रमण होता है या इसे क्षति होती है तो शरीर में कई लक्षण एक साथ दिखने लगते है। इस तरीके की समस्‍या, इंसान की लतों और गंदी आदतों जैसे – धूम्रपान, शराब आदि के कारण बहुत होती है। लिवर डैमेज के बारे में डॉक्‍टर कई टेस्‍ट के बाद ही बताते है लेकिन अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है तो शीघ्र ही डा. से सम्‍पर्क करें। लिवर डैमेज होने के लक्षण निम्‍म प्रकार हैं : लीवर की खराबी होने के लक्षण
1) पीला पड़ना : लि‍वर में किसी भी प्रकार की कोई भी समस्‍या होने पर सबसे पहले शरीर में पीलापन आने लगता है। त्‍वचा, नाखून और आंखों में पीलापन आ जाता है। यहां तक कि पेशाब में पीलापन आता है। ऐसा शरीर में उच्‍च बाईल के कारण होता है। अगर शरीर में लिवर सही ढंग से काम नहीं करता है, तो बाईल तेजी से बनता है और शरीर के कुछ अंगों में उसका असर दिखने लगता है। अगर आपके नाखूनों, स्‍कीन और आंखों में पिछले कुछ दिनों से पीलापन बढ़ता जा रहा हो, तो तुरंत डा. के पास जाएं। Symptoms of liver damage 2) मतली आना : लिवर खराब होने पर इंसान को हर समय घबराहट महसूस होती है और उसे मतली आती रहती है। जब बॉडी में बाईल की मात्रा ज्‍यादा हो जाती है तो उल्‍टी महसूस होना स्‍वाभाविक होता है। ऐसे में आपको डा. को दिखाकर फटाफट दवा खाना शुरू कर देना चाहिये। ये एक गंभीर मामला होता है और इसमें लेटलतीफी न करें। 3) पेट में सूजन आना : लि‍वर खराब होने पर पेट में सूजन बढ़ने लगती है और वह मोटा दिखता है। इस स्थिति में आपको काफी दिक्‍कत होती है। हर समय पेट में एक्‍ट्रा भारीपन लगता है। इस कंडीशन को गैस प्रॉब्लम आदि समझकर इग्‍नोर न करें। ये क्रिटिकल स्‍टेज हो सकती है। 4) नींद आना : लि‍वर खराब होने की स्थिति में व्‍यक्ति को हमेशा आलस्‍य सा लगता रहता है, उसे किसी काम को करने में मन नहीं लगता है जिसकी वजह से उसे हमेशा नींद सताती है। मरीज सही तरीके से किसी भी बात पर प्रतिक्रिया नहीं करता है। ज्‍यादा आलस्‍य आने पर और पेट में लगातार दर्द होने की स्थिति समान्‍य नहीं होती है, ध्‍यान दें। 5) मानसिक दिक्‍कतें : लिवर खराब होने की शुरूआत में सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक दिक्‍कत भी होती है, क्‍योंकि ब्रेन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। ब्रेन तुंरत रिस्‍पॉन्‍स नहीं कर पाता है और मरीज हमेशा कन्‍फ्यूजन में रहता है। ऊपर दिए गए सभी लक्षणों के साथ ये लक्षण होने पर समझ लें कि आपके लिवर में कुछ ठीक नहीं है, डा. के पास जाएं। 6) कोमा : आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि लिवर खराब होने पर व्‍यक्ति कोमा में भी जा सकता है। ऐसे में चूक न करें।

 

Save Liver Save Life

आज के समय में मिलावट की समस्या आम हो चली है , बाज़ार में किसी भी शुद्ध खाद्य पदार्थ का उपलब्ध होना काफी मुश्किल है I इसके अतिरिक्त चारोंओर जंक फ़ूड ही जंक फ़ूड , रहने खाने के तरीके ही बदल गए हैं , थाली में फाइबर फ़ूड गायब हो चूका है I बाज़ार में उपलब्ध मिल का आटा बिल्कुल चोकर या फाइबर रहित है I इसी के कारण दिन प्रति दिन लीवर से सम्बंधित बीमारियों के रोगी बढ़ते ही जा रहे है I लीवर को रुग्ण करने में शराब अलकोहल, सिगरेट एवं औषधियों के दुस्प्रभाव भी कारक कम नहीं हैं I
यूँ तो प्रारंभ में जब लीवर की कोई बीमारी प्रारंभ होती है तो कोई विशेष परेशानी नहीं होती I मुख्यत प्रारम्भ में भूख ,गैस एसिडिटी , कब्ज आदि साधारण से लक्षण दिखायी देते हैं I जिन्हें हम अनदेखा करके ध्यान नहीं देते I इन साधारण समस्याओं के समय जब आप अपने लीवर के टेस्ट करवायेगे तो सब नार्मल होंगे लेकिन समस्या बनी रहेगी I जब लीवर कुछ अधिक बीमार होगा तो फिर लीवर फंक्शन टेस्ट में एंजाइम जैसे S.G.P.T, S.G.O.T,G.G.P.T, Alkaline phosphate, Serum Bilirubine आदि बढ़ने लगते हैं I
इस स्थिति में उचित निदान और उपचार के अभाव में रोग बढ़ने लगता है I अल्ट्रा साउंड करवाने पर लीवर का साइज़ बढ़ा हुआ आता है जिसको हेपेटाइटिस भी कहते हैं I धीरे धीरे लीवर के काम करने की क्षमता घटने लगती है और लीवर प्रोटीन का पाचन नहीं कर पाता तो एकदम वजन घटना प्रारम्भ हो जाता है जो कि प्रोटीन टेस्ट में दिखाई देता है I प्रोटीन इसका लेवल 7 नार्मल होता है , इसके दो अवयव होते हैं I 1. एलबुमिन 2. ग्लोब्लिन I लीवर की बिमारियों में एल्ब्यूमिन घटने लगता है और ग्लोब्लिन बढ़ने लगता है I जो लीवर बढ़ा हुआ आता था अब कोर्स्र इकोटेचर, इरेगुलर सरफेस या सिकुढ़ा हुआ आने लगता है i यह लीवर की भयानक बीमारीका रूप ले लेता है और मरीज के पेट में पानी भरने लगता है , डॉक्टर मरीज की आयु की घोषणा करने लगते हैं कि अब तुम्हारी आयु इतने …..सीमित समय की शेष है i इलाज केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही बचा हैI
उपचार में मरीज को रेस्ट देना और परहेज करवाना हॉस्पिटल में एडमिट मुख्य उद्देश्य होता है i मरीज को यह लगता रहे कि मेरा उपचार बहुत अच्छे तरीके से हो रहा है , प्रतिदिन टेस्ट करवाये जाते हैं और उसकी जेब पर डांका डाला जाता है I यदि पेट में पानी बढ़ जाता है वह सुई लगाकर निकाल दिया जाता है , जिससे मरीज के पेट में कुछ तनाव काम होकर आराम मिलता है I
SAVLIV drops उपरोक्त सभी परिस्थितियों में काम करती है I
1. यह पेशाब को बढ़ाकर पेट में भरे हुए पानी को कम करने लगती है I
2. नए पानी को बनने से रोकती है
3. सीरम बिलिरुबिन के लेवल को कम करती है I
4. एल्ब्यूमिन लेवल को बिना बाहर से चढ़ाये धीरे धीरे बढ़ाती है I
5. ग्लुब्लिन लेवल को सही कर ए जी रेश्यो को बढ़ाती है I

Liver Cirrhosis

माननीय अभिताभ बच्चन शतायु हों I अक्सर सुनने में आता है कि अभिताभ जी का लीवर केवल पच्चीस प्रतिशत कार्य कर रहा हैI आप उनकी सक्रियता देखते हैं ही, उनको भी लीवर सिरोसिस है , ऐसा सुनने में आता है I जब कोई मरीज जो कि सिरोसिस से पीढ़ित है और उसे asitis के लक्षण यानि कि पेट में पानी भरने लगता है तो विद्वान चिकित्सक उसको उसकी आयु बताने लगते हैं कि अब आपकी केवल तीन मास ,या छः मास या एक साल आयु शेष है I ऐसे मरीज जब मुझसे बात करते हैं तो मैं उनसे मजाक में पूछता हूँ कि आपने क्या उन चिकित्सक महोदय से पूछा कि आपकी कितनी आयु शेष है I मरीज मुस्कराने लगता है
हानि लाभ , जीवन मरण , यश अपयश विधि हाथ ऐसा रामचरित मानस में संत श्री तुलसी दास जी ने कहा है
मृत्यु तो कटु सत्य है जिसने तो होना ही है , लेकिन कोई किसी की मृत्यु की भविष्यवाणी नहीं कर सकता I पिछले दिनों मैं जब मुंबई गया तो मेरे एक मरीज के पुत्र श्री सतीश खरप ने कहा मैं आपको इसलिए सम्मान देता हूँ ,क्योंकि आपके कारण मैं अपनी माता जी के साथ सात वर्ष अधिक रह पाया और आगे बताया कि जिस समय savlivdrop मुझे प्राप्त हुई थी उस समय डॉक्टर ने केवल आधे घंटे की उनकी आयु बतायी थी I
इसी प्रकार की घटना तब घटी जब मैं अपने पुत्र से मिलने के लिए देहरादून गया I क्योंकि मैं राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ का स्वयमसेवक हूँ इसलिए देहरादून आने पर राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ के प्रांतीय कार्यालय पर अवश्य जाता हूँ I मैंने वहाँ पर परम पूजनीय डा o नित्यानंद जी को गुरु रामरॉय मेडिकल कोलेज से वापिस कर कह दिया था कि अब इनकी स्रेवा कार्यालय पर ही कर लें I डा o नियानंद जी मेरे मार्ग द्रष्टा रहे थे I उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी Iउनके हाथ पैरों में सुजन कहना तो उचित न होगा बल्कि पानी भरा हुआ था I सब कुछ कार्य पलंग पर ही हो रहा था I उनको तकियों का सहारा देकर बैठा रखा था और एक स्वयंसेवक उन्हें दलिया खिला रहा था I जब स्वयं सेवक दलिया खिलाकर कमरे से बाहर आये तो मैंने उन्हें SAVLIV DROPS दी और डा o साहब को प्रतिदिन देने का आग्रह किया I और मैं वापिस गया I
मैं पुन : तीन पश्चात् गया तो पालथी मार कर बैठे हुए डॉoसाहब बैठे अपने हाथ से दलिया खा रहे थे उस समय डाoसाहब की आयु लगभग 92 वर्ष की थी i इस घटना के पश्चात् डॉo साहब ने लगभग दो वर्ष का जीवन चलते फिरते व्यतीत किया और इसके पश्चात् दो माह पूर्व वे हम सब से विदा लेकर वह कर्म योगी इस संसार से विदा हो गया I इसी कारण से मेरा कहना है कि कोई किसी की आयु नहीं बता सकता चाहे वह डॉक्टर हो या ज्योतिष I